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Saturday 23 March 2019
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महागठबंधन मेें टेंशन: मांझी क्‍या करेंगे कोई नहीं जानता

बिहार: महागठबंधन में सहयोगी दलों के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है। खासकर हम पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक जीतनराम मांझी ने सबकी टेंशन बढ़ा दी है। वे क्या करेंगे, क्या फैसला लेंगे, कुछ नहीं कहा जा सकता है। हालांकि मांझी बार-बार यही कह रहे हैं कि वे महागठबंधन में ही रहेंगे, वे कहीं नहीं जाएंगे। लेकिन, उन पर किसी को भरोसा नहीं हैं। महागठबंधन में शामिल होने के पहले भी मांझी यही कहते रहे थे कि वे एनडीए को नहीं छोड़ेगे। लेकिन पिछले होली में उन्होंने एनडीए को झटका दे दिया था। एक बार फिर होली आ रही है। ऐसे में मांझी की धमकी महागठबंधन के लिए शुभ संकेत नहीं है।

जीतनराम मांझी का फाइल फोटो

उधर मांझी को एनडीए की ओर से लगातार आॅफर मिल रहे हैं। बीजेपी से लेकर जदयू के नेता तक आॅफर दे रहे हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने बुधवार को भी कहा है कि जीतनराम मांझी एनडीए के सम्मानित नेता रहे हैं। वे यदि एनडीए में आना चाहें तो उनका स्वागत है। उन्होंने यह भी गारंटी दी है कि मांझी यदि एनडीए में आते हैं तो सीटों का बंटवारा फिर से होगा। बता दें कि अभी एनडीए में बीजेपी और जदयू के बीच 17-17 सीटों के बीच समझौता हुआ है, जबकि लोजपा के खाते में 6 सीटें गयी हैं।

तेजस्‍वी यादव का फाइल फोटो

इधर हम पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने पटना में ताबड़तोड़ मीटिंग की है। जिलाध्यक्षों व वरीय नेताओं की राय को जाना। इसके बाद उन्होंने कहा कि यदि महागठबंधन में बात नहीं बनी तो हम पार्टी अकेले बिहार में 20 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी। हालांकि उन्होंने बुधवार को फिर दोहराया कि लालू यादव से वे पहले मुलाकात करेंगे, इसके बाद ही कोई निर्णय लेंगे। लेकिन एनडीए में शामिल नहीं होंगे।

दरअसल मांझी को यह भनक लगी है कि उसे महागठबंधन की ओर से बिहार में सिर्फ एक सीट दी जा रही है, जबकि उससे अधिक सीटें उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा और मुकेश सहनी की पार्टी वीआइपी को दी जा रही है। इसके बाद से ही मांझी की भृकुटी तन गई है। उन्होंने साफ साफ कह दिया कि कुशवाहा से कम सीटें हर्गिज नहीं लेंगे।

राहुल गांधी का फाइल फोटो

बहरहाल महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर कवायदें तेज हो गई हैं। तीन दिन पहले राहुल गांधी और तेजस्वी यादव में लंबी मुलाकात हुई है। वहीं तेजस्वी यादव अभी भी दिल्ली में ही हैं, साथ ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा भी दिल्ली में ही हैं। गुरुवार को रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी दिल्ली चले गए हैं। राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चा के अनुसार इस पर जल्द ही कोई ठोस डिसीजन आएगा। संभव है कि इसके बाद ही जीतनराम मांझी अपना पत्ता खोलें।




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