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Saturday 23 February 2019
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मिशन बिहार 2019: कुर्मी समाज में नये चेहरे की खोज

बिहार: लोकसभा चुनाव के आते ही राजनीतिक गलियारों में गतिविधियां तेज हो गई हैं. नेताओं के दौरे शुरू हो गए हैं. पुरानी यादों को भी भुनाना शुरू हो गया है. इसी कड़ी में अब कुर्मी समाज को एकजुट करने की कवायद तेज हो गई है. पटेल सेवा संघ ने महाचेतना कुर्मी रैली की वर्षगांठ मनाने का निर्णय लिया है. इतना ही नहीं, पटना के एसकेएम में 12 फरवरी को होनेवाली महाचेतना कुर्मी रैली की 25वीं वर्षगांठ में 151 लोगों को सम्मानित किया जाएगा. इतना ही नहीं, वर्षगांठ के मौके पर कुर्मी समाज के ऐसे चेहरे की खोजबीन की जाएगी, जो हमारा सही दिशा में प्रतिनिधित्व कर सके.

1994 में 12 फरवरी को बिहार की राजधानी पटना में ऐतिहासिक कुर्मी चेतना महारैली हुई थी. अब उसी कुर्मी समाज को ताकत का अहसास कराने के लिए उसकी 25वीं वर्षगांठ मनाने का निर्णय लिया गया है.

आयोजन समिति के संयोजक अनिल कुमार ने बताया कि 1994 में 12 फरवरी को बिहार की राजधानी पटना में ऐतिहासिक कुर्मी चेतना महारैली हुई थी. अब उसी कुर्मी समाज को ताकत का अहसास कराने के लिए उसकी 25वीं वर्षगांठ मनाने का निर्णय लिया गया है. इसमें पूरे प्रदेश से विभिन्‍न क्षेत्रों में अहम योगदान देने वाले कुर्मी समाज के 151 लोगों को चिह्नित कर सम्‍मानित किया जायेगा.

कुर्मी समाज में और बदलाव के लिए एक फेस की जरूरत है, जिसकी खोज महारैली की 25वीं सालगिरह के मौके पर की जाएगी.

जविपा के राष्ट्रीय संयोजक अनिल कुमार ने बताया कि ऐतिहासिक महारैली काफी अनुशासित हुई थी और उसी के बाद बिहार में कुर्मी समाज की राजनीति में जबर्दस्त भागीदारी बढ़ी है. इसकी वजह से शिक्षा के क्षेत्र में भी समाज काफी आगे बढ़ा है. अब तो प्रशासन, अभियंत्रण, चिकित्‍सा, शोध, व्‍यवसाय आदि क्षेत्रों में भी हमारा समाज प्रतिनिधित्‍व करने लगा है. उन्‍होंने कहा कि मगर, कुर्मी समाज में और बदलाव के लिए एक फेस की जरूरत है, जिसकी खोज महारैली की 25वीं सालगिरह के मौके पर की जाएगी.




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