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Saturday 23 February 2019
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सात समंदर पार बही हिंदी की बयार

hindi-diwas-tanzaniaसात समंदर पार अफ्रीका में शनिवार को सुबह से ही माहौल बदला-बदला हुआ था. हिंदी दिवस को लेकर प्रवासी भारतीय काफी उत्साहित थे. मुख्य अतिथि थे पद्मश्री अशोक चक्रधर व उनकी पत्नी. साथ में इंडियन हाइ कमिश्नर संदीप आर्य भी पहुंचे हुए थे. संस्था स्वर्ण गंगा के अध्यक्ष देवेंद्र पाठक ने आगत अतिथियों का स्वागत किया. तंजानिया से हिंदी दिवस की लाइव रिपोर्ट.

 

विश्वव्यापी भाषा बन गयी है हिंदी
तंजानिया में शनिवार (24 सितंबर) को हिंदी दिवस की धूम रही. शहर दार एस सलेम में भारतीय प्रवाासियों की संस्था स्वर्ण गंगा परिवार की ओर से आयोजित हिंदी दिवस पर भारत के ख्यातिलब्ध साहित्यकार पद्मश्री अशोक चक्रधर का स्वागत किया गया. कार्यक्रम के आयोजन में इंडियन क्लचरल सेंटर की अहम भूमिका रही. साहित्यकार पद्मश्री अशोक चक्रधर को स्वर्ण गंगा की ओर से मुख्य अतिथि के रूप में भारत से खास बुलावा था. मौके पर चक्रधर ने कहा कि हिंदी की अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही. हिंदी अब विश्वव्यापी भाषा बन गयी है. यही करण है कि साउथ अफ्रीका में भी हिंदी की धारा बह रही है. संस्था के संस्थापक देवेंद्र पाठक और इंडियन हाइ कमिश्नर संदीप आर्य ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया.

चक्रधर को सौंपी गयी ‘वो अजीब लड़की’
बिहार के भागलपुर की मूल निवासी व प्रवासी लेखिका प्रियंका ओम ने अशोक चक्रधर को अपना कहानी संग्रह ‘वो अजीब लड़की’ को प्रेजेंट किया. उन्होंने अपने संबोधन में हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने पर जोर दिया. प्रियंका ने कहा कि जापान जाना हो या फ्रांस, वहां की भाषा सीखनी होती है अथवा द्विभाषिया का इस्तेमाल करना होता है. लेकिन भारत में अंग्रेजी से यह परेशानी दूर हो जाती है, इसलिए हिंदी के प्रचार-प्रसार में दिक्कत होती है. हालांकि हिंदी चैनलों व फिल्मों की वजह से हिंदी अब विश्व के स्तर पर पहुंच गयी है.

 

जब स्वर्ण गंगा के लोग एक जगह पर जुटते हैं, तो पता ही नहीं चलता है कि वे लोग भारत के बाहर हैं. इसमें हाेने वाले अपनापन के अहसास को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है, इसे केवल महसूस किया जा सकता है : प्रियंका ओम


क्या है स्वर्ण गंगा परिवार

devendra-pathakतंजानिया में भारतीय मूल के लोगों ने एक संस्था बनायी है. संस्था का नाम स्वर्ण गंगा रखा गया है. भारतीयों में अधिकतर लोग बिहार और झारखंड के रहनेवाले हैं. लगभग 50 परिवार इस संस्था से जुड़े हुए हैं. संस्था के अध्यक्ष देवेंद्र पाठक हैं. वे आये दिन भारतीय पर्व-त्योहारों समेत अन्य खास मौके पर संस्था के माध्यम से तरह-तरह के इवेंट कराते रहते हैं. स्वर्ण गंगा परिवार के अध्यक्ष देवेंद्र  पाठक की मानें तो जब संस्था के लोग जुटते हैं, तो गजब के अपनापन का अहसास होता है. कार्यक्रम में भारतीय व्यंजनों के चटकारे के साथ लोग माहौल का भी लुत्फ उठाते हैं. स्वर्ण गंगा का मुख्य मकसद ही है कि भारतीय प्रवासियों को उनकी संस्कृति व धरोहरों से जोड़े रखना.

अपनापन की बहती है गंगा
Priyankaवो अजीब लड़की फेम प्रियंका ने राजनीतिक अड्डा को बताया कि स्वर्ण गंगा में जब हमलोग जुटते हैं, तो पता ही नहीं चलता है कि वे सब भारत के बाहर हैंं. इसमें होनेवाले अपनापन का अहसास शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं. यूं कहें कि इसमें अपनापन की गंगा बहती है. आये दिन भारतीय पर्व-त्योहारों समेत अन्य खास दिनों पर संस्था की ओर से इवेंट कराये जाते हैं. होली हो या दीवाली, चाहे दशहरा हो, मस्ती के माहौल के बीच स्नेह, प्यार, मिल्लत का अनोखा संगम देखने को मिलता है. क्या बच्चे, क्या बड़े, सब अपनापन के रंग में सराबोर रहते हैं.




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