Search
Wednesday 18 October 2017
  • :
  • :

राधा ने पीया गर्म दूध, कान्हा को हो गये फफोले

Radha_Krishnaकुंवारे कृष्ण और विवाहित राधा की प्रेम कहानी को हमारी संस्कृति की सबसे आदर्श और पवित्र प्रेमकथा का दर्जा हासिल है. जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण के प्रेम को अपने शब्दों से पिरोने का काम किया है साहित्य जगत के सशक्त हस्ताक्षर ध्रुव गुप्त ने. श्री गुप्त की इस रचना पर वरिष्ठ पत्रकार रवि प्रकाश की त्वरित टिप्पणी – ‘इसे लिखने के लिए सिर्फ दृष्टि ही नहीं, साहस की भी जरूरत होती है…’ जन्माष्टमी पर प्रस्तुत है ध्रुव गुप्त की सारगर्भित रचना…

 

 

dhruv-guptकुंवारे कृष्ण और विवाहित राधा की प्रेम कहानी को हमारी संस्कृति की सबसे आदर्श और पवित्र प्रेमकथा का दर्जा हासिल है. विवाहेतर और परकीया प्रेम के ढेरों उदाहरण विश्व साहित्य में हैं, लेकिन इस प्रेम को आध्यात्मिक ऊंचाई सिर्फ भारतीय संस्कृति और काव्य ने दिया है. न कृष्ण की पूजा उनकी पत्नियों के साथ होती है और न राधा की उनके पति के साथ.

अमर प्रेम कहानी का दुखांत पक्ष
इस अमर प्रेम कहानी का सबसे दुखांत पक्ष यह है कि गोकुल से मथुरा जाने और मथुरा से द्वारिका में विस्थापन के बाद कृष्ण को बुढ़ापे तक कभी इतना अवसर नहीं मिला कि दुबारा राधा से मिल कर उसे सांत्वना और अपने प्रेम का भरोसा दे सके. उन्होंने उद्धव जैसे कुछ दूत जरूर भेजे, लेकिन विरही मन कहीं दूतों का उपदेश सुनता है भला ?

रुक्मिणी ने राधा को स्नेहवश कुछ ज्यादा ही गर्म दूध पिला दिया था. राधा तो हंस कर पी गयी, लेकिन कृष्ण के पूरे बदन में फफोले पड़ गये

बुढ़ापे में फिर राधा-कान्हा
कुछ प्राचीन संस्कृत ग्रंथों के अनुसार बुढ़ापे में एक बार फिर राधा और कृष्ण की संक्षिप्त-सी मुलाक़ात हुई थी. शायद अंतिम मुलाकात. जगह थी कुरुक्षेत्र तीर्थ, जहां सूर्यग्रहण के मौके पर स्नान के लिए कृष्ण द्वारिका से पहुंचे थे और राधा नंद बाबा तथा अन्य के साथ वृंदावन से. पता नहीं युगों बाद उस छोटी-सी मुलाकात में कितने आंसू बहे होंगे. कितनी व्यथाएं उभरीं और दब गयी होंगी. कैसे-कैसे उलाहने सुने और सुनाये गये होंगे. कितना प्रेम बरसा होगा और कितना विवाद या शायद भावातिरेक में शब्द ही साथ छोड़ गये होंगे!

जब राधा से मिली रुक्मिणी
जीवन के अंतिम पहर में दो प्रेमियों के मिलन के उस दृश्य की कल्पना ही की जा सकती है. कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी की जिद पर राधा से उनकी मुलाक़ात भी करायी गयी. उल्लेख है कि रुक्मिणी ने राधा को स्नेहवश कुछ ज्यादा ही गर्म दूध पिला दिया था. राधा तो हंस कर पी गयी, लेकिन कृष्ण के पूरे बदन में फफोले पड़ गये. यह प्रेम की आंतरिकता का चरम था. इस मिलन के बाद राधा की जो अनुभूति है, वह तो किसी भी संवेदनशील मन को व्यथित कर देने के लिए पर्याप्त है.

वंशी की धुन व कालिंदी का तट
प्रियः सोsयं कृष्णः सहचरि कुरुक्षेत्रमिलित
स्तथाहं सा राधा तद्दिमुभयो संगमसुखम
तथाप्यन्तः खेलन्मधुरमुरलीपञ्चमजुषे
मनो में कालिंदीपुलिनविपिनाय स्पृहयति।

सखी, प्रियतम कृष्ण भी वही है. मैं राधा भी वही हूं. आज कुरुक्षेत्र में हमारे मिलन का सुख भी वही था. तथापि इस पूरी मुलाकात में मैं कृष्ण की वंशी से गूंजता कालिंदी का वह जाना-पहचाना तट ही तलाशती रही. यह मन तो उन्हें फिर से वृंदावन में ही देखना चाह रहा है.
(नोट : लेखक के ये निजी विचार हैं और इससे वेबसाइट का कोई लेना-देना नहीं है)




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shailesh MLAनीतीश कुमार के बिहार के मुख्यमंत्री बनने पर हार्दिक बधाई : शैलेश कुमार, जद यू विधायक (जमालपुर, बिहार)

 

 

 

anant satyarthiनीतीश कुमार के बिहार के मुख्यमंत्री बनने पर हार्दिक बधाई : अनंत सत्यार्थी, जद यू विधायक (मुंगेर, बिहार)

 

 

 

Anil Singhप्रतीक पीआईटीआई, सितुहार (हवेली खड़गपुर, मुंगेर) की ओर से छात्रों को दुर्गापूजा की हार्दिक बधाई : अनिल कुमार सिंह, सचिव

 

 

 

 

रामविलास पासवान के कैबिनेट मंत्री बनने व चिराग पासवान की जीत पर हार्दिक बधाई  : राजीव कुमार सिंह, लोजपा नेता (पूर्व प्रत्याशी, तारापुर विधान सभा क्षेत्र, बिहार)

 

 

ssssराजनीतिक अड्डा परिवार को पहली वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई : प्रो. सुनील विक्रम सिंह, टीडी कॉलेज, जौनपुर (यूपी)

 

 

 

रामविलास पासवान के कैबिनेट मंत्री बनने व चिराग पासवान की जीत पर हार्दिक बधाई  : राजीव कुमार सिंह, लोजपा नेता (पूर्व प्रत्याशी, तारापुर विधान सभा क्षेत्र, बिहार)