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Saturday 23 February 2019
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‘वो अजीब लड़की’ को भाया बिहार

Priyanka Omअफ्रीका की तंजानिया में रहनेवाली हिंदी कथाकार प्रियंका ओम पिछले 22 जून को अपने तीन दिनों के दौरे पर बिहार आयी हुई थीं. उन्हाेंने अपने बिहार दौरे को काफी सुकून भरा बताया और कहा कि मुझे बिहारी होने पर गर्व है. यहां के लोग अच्छे हैं. यहां की आबोहवा अच्छी है. पटना में हुई चाय पर चर्चा में वो अजीब लड़की की समीक्षा से भी वे काफी खुश थीं. 

 

बिहार पहुंची वो अजीब लड़की
देश में एक ऐसा तबका है, जो बिहार को बदनाम करने पर लगा है. उसका निशाना सिर्फ और सिर्फ बिहार होता है. येन-केन-प्रकारेण एक ही मकसद हाेता है कि महावीर और गौतम बुद्ध की धरती को किस तरह बदनाम किया जाये. जबकि, हकीकत यही है कि बिहार से अच्छा प्रदेश कोई और नहीं है. ‘वो अजीब लड़की’ फेम ऑथर प्रियंका ओम ने बिहार दौरे के क्रम में 25 जून को राजनीतिक अड्डा को एक विशेष भेंट में कहीं. उन्होंने कहा कि मैं भी बिहार से हूं और बिहारी कहलाना मेरे लिए फक्र की बात है. गौरतलब है कि प्रियंका फिलहाल अफ्रीका की तंजानिया में रहती हैं. उनका हिंदी कहानी संग्रह  ‘वो अजीब लड़की’ बहुत ही कम समय में सोशल मीडिया पर छा गया है.

चाय पर चर्चा में भी छा गयी
अफ्रीका की तंजानिया में रहनेवाली कथाकार प्रियंका ओम के कहानी संग्रह ‘वो अजीब लड़की’ पर पटना के जगजीवन राम शोध संस्थान में 25 जून को चर्चा हुई. चाय पर चर्चा कार्यक्रम में कहानीकार प्रियंका ओम खुद मौजूद थीं. वे अपने दो दिवसीय दौरे पर पटना आयी हुई थीं. कार्यक्रम में वो अजीब लड़की, मौत की ओर, सॉरी, मृग मरीचिका, फेयरनेस क्रीम, यादों की डायरी, सौतेलापन, लाल बाबू पर विशेष चर्चा हुई. मौके पर मौजूद संस्थान के निदेशक श्रीकांत, कथाकार अवधेश प्रीत, ऋषिकेश सुलभ, कमलेश समेत अन्य लोग मौजूद थे. साहित्यकारों ने सभी कहानियों को सराहा और इनके पात्रों को बिंदास बताया.

गांव से लेकर शहर तक में मिलते हैं ‘लाल बाबू’
प्रियंका बताती हैं कि वो अजीब लड़की की सभी 14 कहानियां जीवंत हैं. उनके पात्र आपको गांव की गलियों, खेत-खलिहानों से लेकर शहर के चौक-चाराहे व मॉल तक में मिल जायेंगे. खासकर कहानी का एक पात्र लाल बाबू, तो आपको हर जगह दिख जायेगा.  उनकी कहानियां के सभी पात्र बिंदास हैं. अश्लीलता के बाबत प्रियंका ओम कहती हैं कि उनकी कहानियों में कहीं से भी अश्लीलता नहीं है, बल्कि समाज की एक कड़वी सच्चाई है. वे कहती है कि सॉरी कहानी पति-पत्नी के बीच की मनोदशा को दरसाती है, तो मौत की ओर कहानी में उनकी दिवंगत मां की पीड़ा छिपी है.




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