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Wednesday 18 October 2017
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शाबाश दीपा… तुस्सी ग्रेट हो…

Dipa Karmakarमन में हौसला हो तो सब कुछ संभव है. इसे चरितार्थ कर दिखाया है त्रिपुरा की 22 वर्षीया दीपा कर्माकर ने. दीपा ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट बन गयी है. अब वह रियो डि जनेरियो ओलिंपिक में होनेवाले जिम्नास्टिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी. पहली भारतीय महिला के अलावा वह 52 साल लंबे अंतराल बाद खेलों के महासमर के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय जिमनास्ट भी है.

 

 

 

 

 

ओलिंपिक क्वालिफाई की पहली महिला जिमनास्ट
देश को आजादी मिलने के बाद 11 भारतीय पुरुष जिमनास्ट ने ओलिंपिक में शिरकत की थी. इनमें से दो ने 1952, तीन ने 1956 और छह ने 1964 में भाग लिया था, लेकिन दीपा ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट बन गयी. 18 अप्रैल को इतिहास रचनेवाली दीपा को रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करनेवाली महिला कलात्मक जिमनास्ट में व्यक्तिगत क्वालिफायर की सूची में 79वीं जिमनास्ट बनी है.

महिला वाल्टस फाइनल में टॉप पर रही
ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के कुछ ही घंटों बाद दीपा ने रियो ओलंपिक खेलों की परीक्षण प्रतियोगिता में वाल्टस फाइनल में गोल्ड मेडल जीता. 22 साल की दीपा 14.833 प्वाइंट के अपने बेस्ट प्रदर्शन के साथ महिला वाल्टस फाइनल में टॉप पर रही. दीपा ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की. दीपा के पिता दुलाल कर्माकर इस बात को लेकर परेशान थे कि बेटी को बंगाली मीडियम स्कूल में पढ़ायें या फिर अंग्रेजी स्कूल में. उनकी इस दुविधा को भी दीपा ने ही दूर की थी.

तब वह महज सात साल की थी
दीपा ने पिता से कहा था- अंग्रेजी स्कूल में जाऊंगी तो जिम्‍नास्टिक की प्रैक्टिस नहीं कर पाऊंगी. उस समय दीपा महज सात साल की थी. इसकी वजह यह थी कि बांग्ला स्कूल जिम्‍नास्टिक्स हॉल का उपयोग करने की इजाजत देती थी. पिता दुलाल कर्माकर बताते हैं कि ‘हम परेशान थे कि हम उसे अंग्रेजी से दूर रख कर सही कर रहें है या नहीं. लेकिन, वह जिद पर अड़ी रही’ उनके पिता के अनुसार अंग्रेजी सीखने का मोह छोड़ कर दीपा ने सबसे बड़ा त्याग किया.

ठान लिया, तो ठान लिया
अभी राजनीतिक विज्ञान में मास्टर्स कर रही दीपा शुरुआत के दिनों में दीपा जिम्नास्ट को लेकर अनमनी थी. वह एक ही स्टेप बार-बार करके खुश नहीं थी, लेकिन उसने खेल को नहीं छोड़ा.दीपा के पिता भारतीय खेल प्राधिकरण में वेटलिफ्टिंग के कोच हैं. वे कहते हैं- ‘दीपा जिद्दी थी. अगर उसने ठान लिया कि कुछ पाना है, तो उसे पाये बगैर वह बैठेगी नहीं. पहले नेशनल चैंपियनशिप, फिर इंडिया टीम, फिर कॉमनवेल्थ गेम्स और अब ओलिंपिक’ ओलिंपिक के लिए क्‍वालिफाई करने के बाद दीपा ने घर पर मैसेज भेजा,’ हम क्वालिफाई हो गया’ ओलिंपिक क्वालिफिकेशन के लिए दीपा ने अक्तूबर और अप्रैल में हुए नेशनल चैंपियनशिप को भी छोड़ दिया. 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक न जीत पाने के बाद दीपा कई दिनों तक रोती रही थी. 2014 में पदक जीत कर उसने पिछली बार की गलती की भरपाई की.
– आकांक्षा यादव @ शब्द शिखर




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